केले की खेती कैसे करें, केला एक ऐसा फल है जो कि पूरे वर्ष हर मौसम में पाया जाता है, केले में उपलब्ध पोषक तत्व और विटामिन मानव शरीर के लिए अत्यधिक लाभकारी होते हैं केले में फास्फोरस, कैल्शियम और शर्करा जैसे तत्व और विटामिन भी मौजूद होते है अगर किसी व्यक्ति को विटामिन बी की कमी है तो उसे केले का सेवन अवश्य करना चाहिए। यह फल काफी लोकप्रिय हैं रनिंग करने वाले व्यक्तियों को सलाह दी जाती है, कि उन्हें सुबह दो केले अवश्य खाने चाहिए। भारत केला उत्पादन करने में प्रथम स्थान पर है यानी कि सबसे अधिक केले की खेती भारत में ही की जाती है। भारत में सर्वाधिक केले का उत्पादन महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश और कर्नाटक राज्यों किया जाता है, 

केले की खेती कैसे करें

केले का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जाता है जिसके अंतर्गत चिप्स जेली जूस जैम इनके अलावा भी केले का उपयोग और भी कई प्रकार से किया जा रहा है। इसके पौधे का पत्ता सबसे बड़ा दूसरे फलों की तुलना में सबसे बड़ा होता है। यदि कोई किसान भाई इसकी खेती को करना चाहता है तो वह इस खेती के जरिए पूरे वर्ष कमाई कर सकता है। तो चलिए दोस्तों जानते हैं, कि केले की खेती को कैसे किया जाता है इस खेती को करने के लिए कौन सी मिट्टी की आवश्यकता होती है, जलवायु और तापमान पैदावार और लाभ और साथ ही में केले की खेती से जुड़ी हर प्रकार की जानकारी को हम इस लेख के माध्यम से जानने वाले हैं। 

केले की खेती करने के लिए उपयुक्त मिट्टी –

इस खेती को करने के लिए किसान भाई को जीवाश्म युक्त दोमट मिट्टी की आवश्यकता पड़ेगी। तथा उसे ऐसी भूमि का चयन करना है जिसमें जल निकासी का अच्छा प्रबंधन हो अगर जल निकासी वाली भूमि नहीं होगी तो इससे केले के पौधे में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं जिससे कि केले की फसल खराब होने की संभावना रहती है। इस खेती को करने के लिए भूमि का पीएच मान 6 से 8 के मध्य होना चाहिए

केले की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और तापमान 

पौधे को अच्छी तरह से विकास करने के लिए जलवायु और तापमान की अत्यधिक आवश्यकता होती है। और केले की खेती में तो जलवायु का अत्यंत ही महत्व होता है। इस खेती को करने के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती हैं। अगर बारिश के मौसम में इस खेती की शुरुआत की जाए तो यह पौधे की वृद्धि के लिए सबसे अच्छा माना जाता हैं। न्यूनतम तापमान में 14 डिग्री और अधिकतम तापमान में 44डिग्री को यह पौधा सहन करने की क्षमता रखता है।  

केले के पौधे की किस्मे

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में केले की 500 से भी अधिक किस्मे मौजूद है। जिसमें से केले की कुछ उन्नत किस्में इस प्रकार है- 

1. रोवेस्ट्रा  

इस किस्म के पौधे का फल अधिक मीठा होता है, इस पौधे के एक गोंद का वजन लगभग 26 से 31 किलो के आसपास होता है। कच्ची अवस्था के बाद जब केला पकने की अवस्था में चला जाता है और पक जाता है तब इसका रंग चमकीले पीले रंग जैसा हो जाता है। यह किस्म स्पोर्ट और लीफ जैसी बीमारियों से प्रभावित होती हैं 

2. ड्वार्फ कौवेंडीश

केले की अधिक उपज के लिए इस किस्म का उपयोग किया जाता है। इस किस्म में एक गोंद का वजन लगभग 23 से 26 किलो तक होता है। कच्चा रहने पर हरा और पक जाने पर यह पीले रंग का हो जाता है। अगर इसके स्वाद की बात की जाए तो स्वाद में यह फल काफी स्वादिष्ट होता है। इस किस्म में पनामा उक्ठा रोग से सुरक्षा मिलती है। 

3. चिनिया चम्पा

इस किस्म को 2 नामों से जाना जाता हैं, एक तो चिनिया चम्पा और दूसरा पुवान नाम से किस किस्म का फल दूसरी किस्मों की तुलना में छोटा होता है बांस का पौधा लंबा होता है, इस किस्म के एक गोंद का वजन लगभग 21 से 26 किलो तक का होता हैं। इस किस्म की सर्वाधिक खेती  पश्चिम बंगाल बिहार असम तमिल नाडु मैं की जाती है। 

हमने ऊपर आपको कुछ ही किस्मों की जानकारी को बताया है, इनके अलावा भी और भी कई प्रकार की उन्नत किस्में में मौजूद है

केले की खेती के लिए खेत की तैयारिया और उवर्रक

केले के पौधों की रोपाई करने से कुछ समय पहले खेत को  खेती करने के लिए तैयार कर लिया जाता है खेत से झाड़ और कांटे साफ कर लिए जाते हैं। इसके बाद खेत में जुताई की जाती हैं, और मिट्टी को भुरभुरी करने के लिए जुताई के बाद कुछ समय तो खेत को ऐसे ही रहने देते हैं उसके बाद खेतों में रोटावेटर लगाया जाता है जिसके द्वारा तिरछी जुताई कर दी जाती है और अब मिट्टी भुरभुरी हो जाती है। और उसके बाद मिट्टी में पाटा लगाकर उसे समतल कर दिया जाता है,

उसके बाद पौधों को रोपाई करने के लिए समतल की गई मिट्टी में गड्ढों को तैयार किया जाता है। डेढ़ मीटर की दूरी पर सीधी पंक्तियों में इन गड्ढों को रोपाई के लिए तैयार किया जाता है ध्यान रहे पंक्ति में खोदे गए गड्ढे 1 फीट गहरे और 1 फीट चौड़े अवश्य होने चाहिए। जिससे कि पौधे की रोपाई अच्छे से हो जाए गड्ढों में उचित मात्रा में उवर्रक की आवश्यकता भी होती है चलिए उचित मात्रा में गोबर की खाद मिट्टी में अच्छे से मिलाकर गड्ढों में बढ़नी चाहिए। और फिर गड्ढों को पानी देना चाहिए।  

केले की खेती के लिए पौधे की रोपाई

आप केले के पौधों को किसी भी अच्छी नर्सरी से खरीद सकते हैं जिसके पौधे रोगों से मुक्त हो केले के पौधों की रोपाई जून के महीने में करनी चाहिए क्योंकि जून का महीना पौधे की रोपाई के लिए अच्छा माना जाता है और जून के महीने में बारिश अच्छी होती है और केले का पौधा बारिश में अच्छे से विकास करता हैं। 

केले के पौधों के रोग और उनकी रोकथाम

दूसरी फसलों की तरह इस फसल में भी पौधों को रोग लगता है इस फसल में लगने वाले रोग उकठा रोग, लीफ स्पाट, थ्रीप्स लेस विंग बग जैसे नामक रोग होते हैं इन रोगों की रोकथाम के लिए कई प्रकार की दवाइयों का छिड़काव किया जाता है। 

केले की तुड़ाई 

इस फल की तुड़ाई के लिए दो तरीकों को अपनाया जाता है, पहले तरीके में तो कच्चे फलों की तुड़ाई की जाती है और दूसरे तरीके में पकने के बाद फलों की जाती है

केले के फलो की पैदावार और लाभ

दोस्तों अगर इस फल की पैदावार की बात की जाए तो 1 हेक्टेयर खेत से लगभग 55 से 65 टन फसल हर वर्ष प्राप्त की जा सकती हैं,

जो भी किसान भाई इस खेती को करता है, वह इस खेती के जरिए 5 से 6 लाख तक की कमाई कर सकता हैं।

FAQ –

Q.1 = केले के उत्पादन में भारत का स्थान कौनसा है? 

Ans = केले के उत्पादन में भारत प्रथम स्थान पर आता है।

Q.2 = क्या केला मानव शरीर के लिए लाभकारी होता है?

Ans = जी हां दोस्तों केला मानव शरीर के लिए अत्यधिक लाभकारी है क्योंकि इसमें कई प्रकार के विटामिंस और पोषक तत्व पाए जाते हैं। 

निष्कर्ष

आज के इस लेख से आपने केले की खेती कैसे करें कि संपूर्ण जानकारी को जान लिया है, अगर इस लेख से आपको कुछ भी जानकारी मिली है तो इस लेख को आप अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जिससे कि उन्हें भी केले की खेती की संपूर्ण जानकारी मिल सके।

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