जामुन का फल सभी लोगों को बहुत पसंद होता है, इसलिए बाजार में जामुन की बहुत अच्छी डिमांड होती है। ऐसे में अगर किसान लोग जामुन की खेती करते हैं तो उन्हें जामुन की खेती द्वारा काफी फायदा हो सकता है। कई किसान जामुन की खेती करना चाहते हैं परंतु उन्हें जानकारी नहीं है कि जामुन की खेती कैसे करें?

जामुन की रोपाई अक्सर जून से अगस्त के बीच में की जाती है। इस लेख के माध्यम से हम आपको बताते हैं कि जामुन की खेती कैसे करें? साथ ही हम आपको जामुन की खेती से संबंधित अन्य जानकारियां भी देने का प्रयास करेंगे।

जामुन की उन्नत किस्में कौन कौन सी है?

जामुन की कई सारी उन्नत किस्में है जो कि उच्च गुणवत्ता वाली होती है और इनका अधिक से अधिक उत्पादन किया जा सकता है।

राजा जामुन जामुन की यह किस्म बहुत बड़ी और गहरे बैंगनी रंग की होती है। और इसकी गुठली बहुत ही छोटी होती है।

CISHJ -45 – उत्तर प्रदेश में जामुन की इस किस्म को सेंट्रल फॉर सब ट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर आफ लखनऊ द्वारा तैयार किया जाता है। इसकी सबसे अधिक उत्पादकता गुजरात और उत्तर प्रदेश में होती है। इस किस्म का फल मोटा और अंडाकार होता है। साथिया पकने के बाद गोरा काला या नीला रंग का हो जाता है।

गोमा प्रियंका – जामुन का यह किस्म अधिक गद्दार होता है। और यह फल सबसे ज्यादा बारिश के मौसम में पक कर तैयार होता है।

इसके अलावा जामुन की कई उन्नत किस्में जैसे – री-जामुन, कथा, भादों इत्यादि हैं। जिन का उत्पादन अलग-अलग क्षेत्रों में किया जाता है।

जामुन की खेती कैसे करे

यदि आप जामुन के किसी किस्म का उत्पादन करना चाहते हैं तो सबसे पहले आप को चुनना होगा कि जामुन की किस किस्म की खेती करना चाहते हैं, और उसके हिसाब से अपने खेत को तैयार करना होगा। साथ ही जामुन के पेड़ों की देखभाल करनी होगी। चलिए हम आपको जामुन की खेती करने की Step by step जानकारी देते हैं।

  1. जामुन की खेती के लिए मिट्टी और जलवायु

जामुन की खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी की जरूरत होती है। ऐसी भूमि जो उचित जल निकासी वाली हो जामुन की पैदावार के लिए काफी अच्छी मानी जाती है। जामुन की खेती रेतीली भूमि या कठोर भूमि में नहीं की जा सकती। आप जामुन की खेती किस मिट्टी में कर रहे हैं उसका PH level 5 से 8 होना चाहिए।

इसके अलावा जामुन की खेती के लिए बारिश और गर्मी की जलवायु सबसे बेहतर होती है। जामुन के पौधों को ठंडे प्रदेशों या ठंड के मौसम में नहीं होगा या जा सकता है। हालांकि जामुन के पेड़ों पर सर्दी गर्मी या बरसात का ज्यादा असर नहीं होता है परंतु अधिक पाला पड़ने पर जामुन के पेड़ खराब भी हो सकते हैं।

अब यदि हम बात करें तापमान की तो जामुन के पौधों को 20 डिग्री का तापमान की जरूरत होती है। और पौधों का विकास भी बहुत ही सामान्य तापमान में हो सकता है।

  • जामुन के पेड़ के लिए खेत और उर्वरक

जामुन की खेती के लिए सबसे पहले खेत को तैयार करना भी बहुत ही आवश्यक है ताकि जामुन के पेड़ आपको 50 सालों तक फल दे सके। जामुन की रोपाई करने के लिए खेत को सबसे पहले गहरी जुताई करें और पिछले सारी फसलों को पूरी तरह से मिटा दे।

इसके बाद खेत में पानी का प्रयोग कर दे। अब आप खेतों को रोटावेटर की मदद से फिर से जुताई करके खेत की मिट्टी को भुरभुरी कर दे।अब कुछ दिनों के पश्चात खेत को पूरी तरह से समतल कर दें और थोड़ी-थोड़ी दूरी जामुन के पौधों की रोपाई के लिए गड्ढे बना दे।

अब इन गड्ढों में उर्वरक की मात्रा डालने की जरूरत है जिसके लिए सबसे पहले आप गोबर की खाद डालेंगे और जैविक और रासायनिक खाद की उचित मात्रा भी मिलाकर गड्ढों में भर देंगे। गड्ढे भरने के बाद आप उस की सिंचाई कर दे।

  • जामुन की कलम कैसे लगाएं?

सभी लोग जो जामुन की खेती करना चाहते हैं वह जामुन की कलम को ठीक ढंग से नहीं लगा पाते हैं जिसके कारण अक्सर उन्हें यह ढूंढना पड़ता है कि जामुन की खेती कैसे करें? तो जामुन के कलम लगाने का सही तरीका यह है कि कलम को खेत में बनाए गड्ढों में 5 सेंटीमीटर की गहराई तक बोना होता है और उन गड्ढों को अच्छी तरह से भर देना है।

इसके साथ जामुन के पौधों की रोपाई करने से पहले सभी कलमों की जांच जरूर कर ले कि वह सही और स्वस्थ हैं कि नहीं। क्योंकि अक्सर जामुन के पौधों में रोग लगने का खतरा भी हो जाता है।

अब यदि आप जानना चाहते हैं कि जामुन के पौधे या कलम कहां मिलेंगे तो आप सरकारी रजिस्टर नर्सरी से जामुन के कलम या पौधे खरीद सकते हैं। और ध्यान दे की आप जो भी जामुन के पौधे का कलम खरीद रहे हैं वह पूरी तरह से स्वस्थ होने चाहिए और 3 से 4 महीने पुराने होने चाहिए।

जामुन के कलम की रोपाई के लिए बारिश का मौसम चुन सकते हैं क्योंकि बारिश के मौसम में जामुन के पेड़ काफी तेजी से बढ़ते हैं।

  • जामुन के पौधों की सिंचाई

जामुन के पेड़ों को सिंचाई की अधिक आवश्यकता होती है। इसलिए जामुन के कलम या पौधे लगाते ही सबसे पहले आप सभी पौधों की सिंचाई कर दें और हर 2 से 3 दिन पर जामुन के पेड़ों की सिंचाई करते रहे। यदि सर्दियों का मौसम है तो आप 15 दिन के अंतराल पर पौधों की सिंचाई करें।

इसके अलावा यदि बारिश के मौसम में आप सिंचाई करना चाहते हैं तो जब बारिश हुए बहुत दिन हो जाते हैं तब आप इसकी सिंचाई कर सकते हैं। बारिश के मौसम में पौधों को सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती।

  • जामुन के पेड़ों की देखभाल

जामुन के पेड़ों की देखभाल आप कुछ इस तरह से कर सकते हैं कि इसके शुरुआती समय में पौधों में कोई भी तना या नहीं शाखा बिल्कुल भी ना पनपने दें।

इसके बाद जब आप जामुन की तोड़ाई कर लेते हैं तो आपको हर तोड़ाई के बाद शाखा को काटने की जरूरत होती है। जिससे कि पेड़ों पर नई शाखाएं आ सके। इससे जामुन के फलों में अधिक उत्पादन देखने को भी मिलता है।

जामुन के पेड़ों में भी कई तरह के रोग लगते हैं जिसके लिए कई तरह की कीटनाशक दवाओं का उपयोग किया जाता है तो आप ऐसी दवाओं का उपयोग करके पेड़ों की सुरक्षा कर सकते हैं।

जामुन का पौधा कितने साल में फल देता है?

जामुन के पौधों को फल देने के लिए लगभग 8 साल लगते हैं। जामुन के फल जब बैगनी काले रंग के दिखाई देने लगते हैं तब आप जामुन को तोड़ सकते हैं।

ध्यान दें कि जब जामुन के पेड़ों में फूल लग जाए तब आपका जामुन का पेड़ डेढ़ महीने में फल देना शुरू करने लगेगा। इसके अलावा जामुन के एक पेड़ से आपको केवल 80 से 100 किलो फल मिल जाते हैं।

निष्कर्ष

आज के इस लेख में हमने आपको बताया कि जामुन की खेती कैसे करें? उम्मीद है कि इस लेख  के माध्यम से आपको जामुन की खेती से संबंधित सभी जानकारियां मिल पाई होंगी।

यदि आपको इस लेख से संबंधित कोई प्रश्न पूछना है तो आप हमें कमेंट में पूछ सकते हैं।

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