पपीते की खेती कैसे करे, नमस्कार दोस्तों, अगर आप एक किसान हैं, और यदि आप पपीता की खेती की संपूर्ण जानकारी को जानना चाहते हैं, तो आज बिल्कुल ही सही लेख पर आ चुके हैं, आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको पपीता की खेती कैसे करें, की संपूर्ण जानकारी को विस्तार से बताएंगे, जिसमें  हम जानने वाले हैं, कि पपीता की उन्नत किस्में क्या है, और पपीता की खेती को करने के लिए मिट्टी, जलवायु, तापमान, क्या होने चाहिए, और इस खेती को करने पर हम कितनी पैदावार प्राप्त कर सकेंगे, इसी के साथ में हम पपीता की खेती से जुड़ी संपूर्ण जानकारी को विस्तार रूप से जानने की कोशिश करेंगे। तों चलिए दोस्तों पपीता की खेती कैसे करे की जानकारी को जानते हैं – 

पपीते की खेती कैसे करे

दोस्तों पूर्व समय की अगर बात की जाए तो उत्तरांचल, मिजोरम, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पंजाब, गुजरात, जम्मू एवं कश्मीर, तमिलनाडु, बिहार, असम, हरियाणा जैसे कुछ ही राज्यों में पपीता की खेती की जाती थी। लेकिन वर्तमान समय में इन राज्यों में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में  पपीता की खेती की जा रही है,

पपीता एक फल है। पपीते के पौधे से कम समय में पैदावार को प्राप्त किया जाता है। पपीते के फल को कच्चा और पक्का दोनों रूपों में उपयोग में लिया जाता है इस फल में कई प्रकार के विटामिन पाए जाते हैं, इसलिए यह फल  मानव शरीर के लिए अत्यधिक गुणकारी होता है, साथ ही इस फल में पपेन नाम का एक एंजाइम भी होता है। यह एंजाइम भी हमारे शरीर के लिए लाभदायक है, अक्सर मानव शरीर में कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। तो कहीं बाहर हमें डॉक्टर पपीता के फल का सेवन करने की सलाह भी देते हैं।

पपीता की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी

हर प्रकार की खेती को करने के लिए हमें उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता पड़ती है, ठीक उसी प्रकार पपीते की खेती को करने के लिए भी हमे उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती हैं, बलुई दोमट मिट्टी को इस खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति इसकी खेती को करना चाहता है तो इसकी खेती के लिए भूमि का P.H मान 6.5 से लेकर 7. 5 के आस पास होना चाहिए।

पपीता की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और तापमान

इसकी खेती को किसी भी मौसम में , किया जा सकता है। इस फसल के पौधे  5 डिग्री न्यूनतम और 44  डिग्री के  अधिकतम तापमान को सहन करने की शक्ति रखते है, सर्दियों में हम देखते हैं कि पाला गिरता है लेकिन ध्यान रहे यह पाला इन पौधों के लिए हानिकारक होता है क्योंकि यह पाला गिरने पर इनके पौधे को हानि पहुंचाता है। अगर बताए गए तापमान से कम या अधिक तापमान होता है तो इससे फसल को नुकसान हो सकता है। 

पपीते की खेती के लिए खेत की तैयारिया और उवर्रक

यदि आप एक किसान है तो आपको तो पता ही होगा की  किसी भी प्रकार की खेती को करने के लिए सबसे पहले हमे खेत की साफ सफाई करनी होती है ठीक उसी प्रकार इस खेती को करने के लिए सबसे पहले हमें पिछली फसल के सभी अवशेषों को पूर्ण रूप से नष्ट करना होगा। इन सभी अवशेषों को नष्ट करने के लिए हम मिट्टी में गहराई से जुताई कर सकते हैं जिसकी मदद से पुराने अवसर अवसर संपूर्ण रूप से नष्ट होने लग जाते हैं। अब आपको गोबर की खाद  चुनी गई मिट्टी में मिला देनी है ध्यान रहे आपको मिट्टी में आवश्यकतानुसार के अनुसार गोबर की खाद को मिला देना है, अच्छी तरीके से मिलाने के लिए आप रोटावेटर की मदद ले सकते हैं। इसके बाद इस खेत में आपको फिर से जुताई कर देनी है इतना करने पर खाद और मिट्टी अच्छे से मिल जाएंगे। उसके बाद आपको खेतों में पानी बहा देना है। और उस खेत को सूखने का इंतजार करना है जब वह खेत का पानी संपूर्ण रूप से सूख जाता है तो अब जुदाई करके मिट्टी को भुरभुरा कर देना है। 

ऊपर बताए गए सभी कार्यों को करने के बाद अब आपको पाटा लगाकर भूमि को एक जैसा समतल बना देना जिससे कि भूमि में जलभराव जैसी समस्या देखने को नहीं मिलेगी।

अब मिट्टी और खेत का काम लगभग पूरा हो चुका हैं। अब हमें भूमि समतल करने के बाद खेत में गड्ढों को तैयार करना होता है। इन गड्ढों में उचित मात्रा गोबर खाद और उससे जुड़े कुछ आवश्यक पोषक तत्वों से भरे अवशेष डाल देने हैं। 

पपीते की उन्नत किस्में

शुरुआती दौर में पपीते की कम किस्मै थी, लेकिन अगर वर्तमान में देखा जाए तो पपीते के वर्तमान समय में कई प्रकार की किस्में मौजूद है, जिसके द्वारा किसान अच्छी खासी पैदावार हासिल कर रहा है।

कम समय में अधिक पैदावार देने वाली किस्म ताइवान ई हाइब्रिड, इजराइली हैं, इस किस्म का उपयोग ऐसे लोग करते हैं जोकि कम समय में अधिक पैदावार हासिल करना चाहते हैं। और भी कई प्रकार की किस्में कुछ इस प्रकार है। पुसा, कोयंबटूर प्रजाति, पंत पपीता, जाइंट अलावा पेन एल,  आदि इनके अलावा भी और कई प्रकार की किस्में है पपीता की मौजूद है।

पपीता के पौधे की रोपाई का समय

देखिए दोस्तों आप सीधे भी पपीता के बीजों के द्वारा पपीता की खेती को खेत से ही कर सकते हैं। लेकिन इसमें मेहनत ज्यादा है और हमें देखरेख भी अधिक करनी पड़ती हैं, इसलिए पपीता के पौधे को रोपाई के लिए पोध के रूप में तैयार किया जाता है, पौध के रूप में उन्हें पॉलिथीन में तैयार किया जाता है, और कुछ समय बाद जब पौधे पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं तो उन्हें उस पॉलिथीन से निकालकर गड्ढों में पौधो की रोपाई की जाती है। बीजों के द्वारा या तो आप अपने घर से ही पौधों को तैयार कर सकते हैं या फिर अपनी नजदीकी किसी नर्सरी में जाकर वहां से पपीता के पौधे को ख़रीद सकते हैं। 

आपको पपीता की खेती को करना है तो आपको किसी भी एक तरीके को तो अपनाना ही होगा दोस्तों अगर आप नर्सरी से पौधे को लाते हो या फिर घर पर ही बीज से पौधा बनाते हो तो आप किसी भी तरीके को अपना सकते हैं अब अगर पपीते के पौधे की रोपाई की बात की जाए तो पपीते  के पौधे की रोपाई आप किसी भी समय में कर सकते हैं।

पपीते के पौधों के रोग और उनकी रोकथाम

हर फसल की तरह ही पपीता के पौधों में भी रोग लगते हैं जिनके कारण पौधो की पैदावार को काफी नुकसान हो सकता है। रोग के अंतर्गत डिस्टॉर्शन, रिंगस्पॉट मोजौक लीफ कर्ल  व पौधों के कई भाग में सड़न आ जाना यह सब पौधों के रोग हैं अगर किसी के पौधों को यह रोग हो जाते हैं तो इनकी रोकथाम जल्द होनी चाहिए नहीं तो यह रोग पौधों को अधिक हानि पहुंचा सकते हैं। इन रोगों की रोकथाम के लिए कई प्रकार की उपयोगी कीटनाशक दवाइयों का उपयोग करके छिड़काव करना जैसे की

वोर्डोमिक्सचर 5:5:20 अनुपात का लेप इस प्रकार की दवाई का उपयोग आपको उस टाइम पर करना है जब पौधा संडन गलन की स्थिति में हो। इसके अलावा भी कई प्रकार के रोग हैं। 

पपीता के पौधे की सिंचाई 

पपीता के पौधे को अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है

शरद ऋतु में 10 से 15 दिनों के अंतराल मैं आपको सिंचाई करनी है और वही ग्रीष्म ऋतु में आपको 1 सप्ताह में सिंचाई करनी है सिंचाई की कई प्रकार की विधियां हैं जिन्हें भी आप अपना सकते हैं पौधा अच्छी प्रकार से विकास तब कर सकेगा जब उसे अच्छा तापमान और वृद्धि के लिए नमी और ये पर्याप्त मात्रा में मिलेंगे तब,

पपीता की तुड़ाई

पपीता जब लगता है तो उसका रंग हरा होता है लेकिन समय के साथ जब वह पल पकने लगता है तो उसका रंग पीला होने लगता है तब उसकी तुड़ाई कर ली जाती है।

पपीता के फलो पैदावार और लाभ

एक हेक्टेयर के खेत से लगभग 35 से 40 टन की पैदावार पपीते की खेती को करके आराम से प्राप्त की जा सकती है। पपीता की खेती को करके आप 1 लाख से लेकर डेढ़ लाख तक का अच्छा खासा मुनाफा हासिल कर सकते हैं।

FAQ:

  1. पपीता की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी?

    Ans – बलुई दोमट मिट्टी को इस खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है। 

  2. क्या कोई भी किसान इस खेती को कर सकता हैं

    Ans: तो जी हां दोस्तों कोई भी किसान जो इस खेती को करना चाहता है वह इसे कर सकता है।

निष्कर्ष 

हमने आज इस लेख में पपीता की खेती कैसे करें की संपूर्ण जानकारी को जान लिया है। अगर पपीता की खेती से जुड़े आपके पास कोई भी सवाल है तो आप उन्हें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

Categories: Biography

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